मध्य विद्यालय असानपाठ में आज अवकाश दिवस होने के बावजूद, बाल संसद एवं विभिन्न समिति सदस्यों के सहयोग से अंबेडकर जयंती का आयोजन अत्यंत गरिमामय एवं भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बच्चों की स्वैच्छिक उपस्थिति और उनका उत्साहपूर्ण सहभाग विशेष रूप से सराहनीय रहा।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए, डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन एवं उनके महान योगदान पर प्रकाश डाला तथा उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। बच्चों का अनुशासन, लगन और सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि ग्रामीण परिवेश में भी प्रतिभा और संस्कार की कोई कमी नहीं है।
विद्यालय परिवार ने इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सही दिशा और प्रेरणा मिले, तो बच्चे अपने गुरुजनों एवं माता-पिता का मान बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
इस अवसर पर यह विचार विशेष रूप से उभरकर सामने आया—
“जहाँ शिक्षा, सम्मान और संस्कार का संगम होता है, वहीं सच्चे राष्ट्रनिर्माताओं का निर्माण होता है।”
कार्यक्रम का समापन “जय भीम, जय भारत” के नारों के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।

