चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम): मध्य विद्यालय आसनपाठ आज अपने नवाचार और शैक्षणिक सुधारों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं विद्यालय के शिक्षक विमल किशोर बोयपाई, जिनके प्रयासों ने एक साधारण विद्यालय को प्रेरणास्रोत बना दिया।
2017 से 2025 तक का शैक्षणिक परिवर्तन
वर्ष 2017 में जब विमल किशोर बोयपाई का स्थानांतरण मध्य विद्यालय आसनपाठ में हुआ, तब विद्यालय कई चुनौतियों से जूझ रहा था। सीमित संसाधन, छोटा परिसर, कम छात्र उपस्थिति, अभिभावकों की उदासीनता और सह-शैक्षणिक गतिविधियों की कमी जैसी समस्याएं मौजूद थीं।
इन परिस्थितियों को बदलने के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास और नवाचार की दिशा में काम किया।
नवाचार से बदली विद्यालय की पहचान
शिक्षक विमल ने बच्चों के बीच शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए कई नवाचारी पहल कीं।
बाल संसद के माध्यम से छात्रों में नेतृत्व क्षमता विकसित की गई और विद्यालय में अनुशासन व स्वच्छता को बढ़ावा मिला। विद्यालय परिसर को फूलों और बागवानी से सजाकर आकर्षक बनाया गया।
खेल और कौशल विकास पर विशेष ध्यान
विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कराटे, बॉक्सिंग और तीरंदाजी जैसे खेलों का प्रशिक्षण शुरू किया गया।
इसके साथ ही अभिभावकों की नियमित बैठकें, वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता और वनभोज जैसे आयोजन विद्यालय की पहचान बन गए।
सम्मान राशि से विद्यालय का विकास
शिक्षक विमल किशोर बोयपाई की कार्यशैली से प्रभावित होकर जिला शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें ₹50,000 की सम्मान राशि प्रदान की गई। इस राशि का उपयोग उन्होंने विद्यालय के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों में किया।
अनुशासन और गुणवत्ता का प्रतीक बना विद्यालय
आज विद्यालय के छात्र निजी स्कूलों की तर्ज पर बैंड की धुन पर यूनिफॉर्म (दलीय टी-शर्ट) में परेड करते हैं। अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के कारण यह विद्यालय जिले के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
विद्यालय की इस परिवर्तनकारी यात्रा पर आधारित केस स्टडी से प्रभावित होकर राष्ट्रीय सेमिनार में उपस्थित शिक्षाविदों और जेसीईआरटी के उपनिदेशक द्वारा शिक्षक विमल किशोर बोयपाई को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।


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